इजाज़त

तू इजाज़त दे अगर तो,
तेरे कानों में प्यार की इक धून सुनानी है,
तेरे संग ख़्वाबों की दुनियां बसानी है,
गोरे गालों की लाली से इश्क़ की ताज़ीन करानी है,
तेरी हर अदा मेरी आदत में शामिल करानी है...

तू इजाज़त दे अगर तो,
गुस्ताख़ निग़ाहों से पढ़नी है चाहत तेरी,
शरमाते होठों से चुरानी है मोहब्बत तेरी...
मेरी साँसों पे तेरा नाम लिखना है,
तेरी पलकों कोे प्यार का पैमान भेजना है...

तू इजाज़त दे अगर तो,
तेरी धड़कनों को सुनना है,
तेरी आहटों को महसूस करना है,
तेरी हँसी की तरह खिलखिलाना है,
बाउम्र मुझे बस तेरा ही रहना है...

तू इजाज़त दे अगर तो,
तेरी सादगी में घुलना है,
तेरी आवारगी में बहकना है,
तेरी अंगडाईयों को देखना है,
तेरी शरारतों को सीखना है...

तू इजाज़त दे अगर तो,
तेरे माथे की बिन्दी सा चमकना है,
तेरे कंगन की तरह खनकना है,
तेरे पायल की घुँगरू सा छनकना है,
तेरे हाथों की मेहंदी में रंगना है...

तू इजाज़त दे अगर तो,
बिखरी तक़दीर को मेरी तेरी तस्वीर सा सँवारना है,
इश्क़ में तेरे मुझे दीवानों सा मचलना है...

तू इजाज़त दे अगर इक कहानी तेरे नैनों को सुनानी है...
लब्जों में जो ना कह सके दास्ताँ वो बयाँ करनी है...

तू इजाज़त दे अगर तेरी झुल्फ़ों के सायें में रहना है सदा...
रहना है तेरी पनाहों में होके दुनियासे गुमशुदा...

तू इजाज़त दे अगर, मुझे तेरे दिल की बात बनना है...
तेरे दिल में भी रहना है और होंठों पे भी ठहरना है...

इक इजाज़त मुझे फ़िर उस खुदा से भी लेनी है,
उससे भी ज्यादा मुझे तेरी इबादत करनी है...

इक इजाज़त मुझे फ़िर वक़्त से भी लेनी है,
जब जब साथ रहे तू मेरे, उससे थम जाने की फ़रमाइश करनी है...

इक इजाज़त मुझे फ़िर उस बारिश से भी लेनी है,
तू आयेगी जब भी पास मेरे, उसे बरसने की नुमाईश करनी है...

तू इजाज़त दे अगर तेरी बाहों में जिंदगी गुज़ारनी है...
वीरानी सी दुनिया मेरी तेरी मोहब्बत से सजानी है...

बेइन्तेहासी मोहब्बत हो गयी है ए हमनवा तुझसे,
तू इजाज़त दे अगर तो, ये जिन्दगी मुझे संग तेरे  गुजारनी है...

- स्वप्निल संजयकुमार कोटेचा

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